Wednesday, July 15, 2026

5 लाख में सरकारी नौकरी का सौदा! माइक्रो डिवाइस से परीक्षा पास कराने वाले हाईटेक नकल सिंडिकेट का STF ने किया भंडाफोड़, 13 गिरफ्तार

सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल कराने की साजिश नाकाम, प्रयागराज से संचालित गैंग के तार वाराणसी परीक्षा केंद्रों तक जुड़े मिले, दो मास्टरमाइंड फरार।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 13 2026 | 11:25:00 AM
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उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले संगठित गिरोह का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। वाराणसी और प्रयागराज में की गई संयुक्त कार्रवाई में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरोह परीक्षार्थियों से 5 लाख रुपये तक लेकर माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए परीक्षा में नकल कराता था। पुलिस ने मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, प्रिंटर, प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट और प्रवेश पत्र बरामद किए हैं।

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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूलकर प्रतियोगी परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह का उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ा खुलासा किया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित लघु सिंचाई विभाग के सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल कराने की साजिश को एसटीएफ ने समय रहते विफल कर दिया। कार्रवाई में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के दो प्रमुख मास्टरमाइंड मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है।

एसटीएफ के अनुसार यह गिरोह प्रयागराज से संचालित हो रहा था और वाराणसी के परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों को माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वर प्रश्नों के उत्तर बता रहे थे। इस पूरे नेटवर्क में सॉल्वर, तकनीकी सहयोगी, परीक्षार्थी और निगरानी करने वाले सदस्य शामिल थे।

परीक्षा से पहले ही सक्रिय थी एसटीएफ

12 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गाजियाबाद और वाराणसी में सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा को निष्पक्ष और नकलमुक्त कराने के लिए एसटीएफ की विभिन्न इकाइयों को पहले से ही सक्रिय कर दिया गया था। इसी क्रम में एसटीएफ वाराणसी फील्ड यूनिट ने गुप्त सूचना और तकनीकी इनपुट के आधार पर जांच शुरू की।

जांच के दौरान जानकारी मिली कि प्रयागराज में एक संगठित गिरोह भारी रकम लेकर माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने का काम कर रहा है। सूचना की पुष्टि होने के बाद निरीक्षक अनिल कुमार सिंह, राघवेन्द्र मिश्र और उपनिरीक्षक आलोक सिंह के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें गठित की गईं।

सूचना मिलते ही तीन स्थानों पर एक साथ छापेमारी

विश्वसनीय सूचना मिलने पर एसटीएफ ने वाराणसी के एंग्लो इंडियन मुस्लिम इंटर कॉलेज, लल्लापुरा, हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज, मैदागिनी और प्रयागराज के रामगढ़ कोठारी में एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान परीक्षा केंद्रों के भीतर नकल कर रहे दो अभ्यर्थियों, बाहर निगरानी कर रहे सहयोगियों, सॉल्वरों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

ऐसे चलता था पूरा हाईटेक नकल का नेटवर्क

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का सरगना शिवजीत पटेल है, जो अपने भाई कप्तान सिंह पटेल, दीपक पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेन्द्र यादव के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क संचालित करता था।

गिरोह अपने रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से संपर्क करता था। उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि परीक्षा में सॉल्वर की मदद से पास करा दिया जाएगा। इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जाते थे।

परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों के कपड़ों और कान के भीतर अत्यंत छोटे माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा दिए जाते थे। परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्नपत्र किसी माध्यम से बाहर मौजूद गिरोह तक पहुंचाया जाता था। प्रयागराज में पहले से मौजूद सॉल्वर प्रश्न हल करते और मोबाइल नेटवर्क के जरिए अभ्यर्थियों को सही उत्तर क्रमवार बताते थे।

5 लाख रुपये तक वसूले जाते थे

गिरफ्तार अभ्यर्थी धर्मेन्द्र कुमार ने पूछताछ में बताया कि उसने परीक्षा पास कराने के लिए 3.75 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे, जबकि 1.25 लाख रुपये नकद दिए थे।

वहीं दूसरे अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा ने स्वीकार किया कि उसने 5 लाख रुपये नकद और 25 हजार रुपये इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की व्यवस्था के लिए कप्तान सिंह पटेल को दिए थे।

एसटीएफ के अनुसार प्रत्येक सॉल्वर को परीक्षा हल कराने के बदले 20-20 हजार रुपये दिए जाते थे।

परीक्षा केंद्र के बाहर भी तैनात रहते थे गिरोह के सदस्य

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल तकनीकी उपकरणों के भरोसे काम नहीं करता था। प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर उनका एक सदस्य मौजूद रहता था, जो पुलिस और परीक्षा प्रबंधन की गतिविधियों पर नजर रखता था। किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत अंदर और बाहर मौजूद लोगों को सतर्क किया जाता था।

दो मास्टरमाइंड फरार

एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर गिरोह का सरगना शिवजीत पटेल और उसका सहयोगी राजेंद्र यादव उर्फ धीरेन्द्र यादव मौके से फरार हो गए। दोनों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

क्या-क्या हुआ बरामद

एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया है। इसमें शामिल हैं—

  • 11 मोबाइल फोन
  • 4 माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
  • 2 प्रिंटर
  • 2 प्रवेश पत्र
  • 2 प्रश्नपत्र
  • 2 ओएमआर शीट

इन बरामदगी से स्पष्ट है कि गिरोह ने परीक्षा में नकल कराने के लिए पूरी तकनीकी व्यवस्था पहले से तैयार कर रखी थी।

13 गिरफ्तार आरोपियों में अभ्यर्थी भी शामिल

गिरफ्तार 13 आरोपियों में प्रयागराज और प्रतापगढ़ के कई निवासी शामिल हैं। इनमें गिरोह के सक्रिय सदस्य, तकनीकी सहयोगी, सॉल्वर और दो अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जो परीक्षा केंद्रों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ पकड़े गए।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

एसटीएफ की कार्रवाई के बाद थाना सिगरा और कोतवाली वाराणसी में आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम की धारा 4, 8 और 13(1)(2)(3) के तहत अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।

एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने पूर्व में आयोजित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरह की साजिश रची थी या नहीं। जांच एजेंसियां गिरोह के आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और तकनीकी नेटवर्क की भी गहन पड़ताल कर रही हैं।

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