उत्तर प्रदेश एसटीएफ की नोएडा यूनिट और अंबेडकरनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख रुपये का इनामी और खूंखार डकैत आसिफ उर्फ विक्की मुठभेड़ में घायल होने के बाद अस्पताल में दम तोड़ गया। वह पिछले 12 वर्षों से हत्या, डकैती और लूट की कई सनसनीखेज वारदातों में वांछित था।
उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सोमवार सुबह एक बड़ी सफलता मिली। वर्षों से हत्या और डकैती की खौफनाक वारदातों के लिए कुख्यात और एक लाख रुपये के इनामी अपराधी आसिफ उर्फ विक्की छैमार का आतंक आखिरकार खत्म हो गया। यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट और अंबेडकरनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान थाना बेवाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में वह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान आसिफ उर्फ विक्की छैमार पुत्र बाबू उर्फ मजहर, निवासी मकनपुर, थाना बिठूर (बिल्हौर क्षेत्र), कानपुर नगर के रूप में हुई है। वह लंबे समय से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा हरियाणा और राजस्थान में सक्रिय संगठित डकैती गिरोह का सदस्य था और विभिन्न मामलों में वांछित चल रहा था।

मुठभेड़ के दौरान हथियार और कारतूस बरामद
एसटीएफ के मुताबिक मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से 32 बोर की पिस्टल, 12 बोर की पौनिया (देशी बंदूक), बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस तथा एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस बरामद हथियारों और वाहन की भी जांच कर रही है।
घरों में घुसकर परिवारों को बंधक बनाना था गिरोह का तरीका
जांच एजेंसियों के अनुसार आसिफ का गिरोह बेहद शातिर और निर्दयी था। गिरोह रात के समय घरों में घुसकर पूरे परिवार को बंधक बना लेता था। इसके बाद नगदी, जेवरात और कीमती सामान लूट लिया जाता था। यदि कोई सदस्य विरोध करता, तो उस पर धारदार हथियारों या अन्य हथियारों से जानलेवा हमला किया जाता था। कई मामलों में विरोध करने वालों की हत्या तक कर दी गई।
यही वजह थी कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उसका नाम सुनते ही लोग दहशत में आ जाते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ डकैती, हत्या, डकैती के दौरान हत्या, लूट और अन्य गंभीर अपराधों सहित 21 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
जौनपुर डबल मर्डर का मुख्य आरोपी था आसिफ
आसिफ वर्ष 2014 में जौनपुर जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र में हुई उस सनसनीखेज वारदात का प्रमुख आरोपी था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। उसने अपने साथियों के साथ एक घर में घुसकर पूरे परिवार को बंधक बनाया, लाखों रुपये के जेवरात और नकदी लूट ली तथा परिवार के पांच सदस्यों पर धारदार हथियारों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

इस हमले में स्वाति और सुमन की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस जघन्य अपराध के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
सुल्तानपुर में हत्या कर डाली थी डकैती
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 19 अक्टूबर 2013 को सुल्तानपुर जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में आसिफ ने अपने करीब 10 साथियों के साथ मिलकर एक घर में डकैती डाली थी। इस दौरान घर के लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में भी वह लंबे समय से वांछित था।
कौशांबी में बुजुर्ग दंपती की हत्या
आसिफ के अपराधों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। 15 अगस्त 2015 को उसने अपने गिरोह के साथ कोखराज थाना, कौशांबी क्षेत्र में एक घर में डकैती डाली। वारदात के दौरान शिकायतकर्ता अवनि कुमार टैगोर के माता-पिता की निर्ममता से हत्या कर दी गई। इस मामले में भी पुलिस उसे वर्षों से तलाश रही थी।
मुजफ्फरनगर में एक ही रात छह घरों में डकैती
19 अगस्त 2015 को मुजफ्फरनगर के छपार थाना क्षेत्र में आसिफ और उसके साथियों ने एक ही रात में आतंक मचा दिया था। गिरोह ने पहले महावीर सिंह के घर में घुसकर पूरे परिवार को बंधक बनाया, डकैती की और उनकी पुत्रवधू पर धारदार हथियार से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।

इसके बाद उसी रात गिरोह ने पांच अन्य घरों को भी निशाना बनाया और वहां भी डकैती की वारदात को अंजाम दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी दहशत फैल गई थी।
2021 में भी हत्या की वारदात में आया था नाम
पुलिस के अनुसार 13 जनवरी 2021 को रसूलाबाद, कानपुर देहात क्षेत्र में रेशमा के पति तासीम की हत्या के मामले में भी आसिफ का नाम सामने आया था। इससे स्पष्ट है कि वर्षों तक फरार रहने के बावजूद उसने आपराधिक गतिविधियां नहीं छोड़ी थीं।
एक लाख का घोषित था इनामी अपराधी
उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह विशेष रूप से 2013 की सुल्तानपुर हत्या व डकैती, 2014 के जौनपुर डबल मर्डर, तथा 2015 की मुजफ्फरनगर डकैती सहित कई मामलों में लगातार वांछित चल रहा था।
STF की कार्रवाई से कई पुराने मामलों के खुलने की उम्मीद
एसटीएफ का मानना है कि आसिफ के मारे जाने के बाद उसके गिरोह के अन्य सदस्यों, पुराने आपराधिक नेटवर्क और लंबित मामलों की जांच को नई दिशा मिलेगी। पुलिस अब उसके सहयोगियों, हथियारों की आपूर्ति करने वालों और गिरोह से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में जुट गई है।
इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, क्योंकि करीब एक दशक से अधिक समय तक पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना यह खूंखार अपराधी आखिरकार कानून के शिकंजे से बच नहीं सका।
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