लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में 27 मई 2026 को हुए प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। 43 दिनों से फरार चल रहे एक लाख रुपये के इनामी आरोपी सचिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या की पूरी साजिश, रेकी, मोटरसाइकिल खरीदने से लेकर वारदात के बाद फरारी तक की पूरी कहानी पुलिस के सामने बयां की है।
लखनऊ के बहुचर्चित प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी कामयाबी मिली है। लगभग डेढ़ महीने से फरार चल रहे और एक लाख रुपये के इनामी आरोपी सचिन कुमार को एसटीएफ ने पीजीआई थाना पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त अवैध पिस्टल, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान सचिन कुमार, पुत्र सरवतलाल, निवासी मुबारकपुर, थाना टांडा, जनपद अंबेडकरनगर के रूप में हुई है। उसे 8 जुलाई 2026 की रात करीब 11:15 बजे किसान पथ ओवरब्रिज के नीचे डलौना के पास, थाना पीजीआई क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
क्या-क्या हुआ बरामद
गिरफ्तारी के दौरान एसटीएफ ने आरोपी के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 0.32 बोर की अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस, बिना नंबर प्लेट की अपाचे मोटरसाइकिल, जिसका इस्तेमाल हत्या और रेकी में किया गया था, तथा 2,200 रुपये नकद बरामद किए हैं।
27 मई को दिनदहाड़े हुई थी हत्या
यह पूरा मामला 27 मई 2026 का है, जब लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की उनके कार्यालय के बाहर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पीजीआई थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश एसटीएफ की कई इकाइयों को आरोपियों की गिरफ्तारी और साजिश का खुलासा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
जांच के दौरान एसटीएफ ने 31 मई को मुख्य साजिशकर्ता समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15 जून को शूटरों की व्यवस्था करने वाले गंगाराम यादव को भी दबोच लिया गया। वहीं मुख्य शूटर संजय उर्फ संजीव 27 जून को पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ था और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से सचिन कुमार की तलाश लगातार जारी थी।
कई राज्यों में चल रही थी तलाश
एसटीएफ की टीम लखनऊ, अयोध्या, अंबेडकरनगर, बस्ती, आजमगढ़ सहित महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक आरोपी की तलाश कर रही थी। आखिरकार 8 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली कि सचिन किसी व्यक्ति से मिलने डलौना क्षेत्र आने वाला है। सूचना मिलते ही एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में कबूल की पूरी कहानी
पूछताछ में आरोपी सचिन कुमार ने स्वीकार किया कि हत्या वाले दिन वह मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि पीछे बैठे संजय ने संदीप सिंह पर गोली चलाई थी। उसके अनुसार हत्या की पूरी साजिश प्रॉपर्टी विवाद और पुरानी दुश्मनी के चलते रची गई थी।
आरोपी ने बताया कि दिनेश यादव, संदीप सिंह की हत्या कराना चाहता था। उसके ड्राइवर मुकुन्दनी ने दिनेश की मुलाकात गंगाराम यादव से कराई। इसके बाद गंगाराम ने सचिन और शूटर संजय की मुलाकात दिनेश यादव से करवाई, जहां संजय को हत्या के लिए एक लाख रुपये एडवांस दिए गए थे। बाकी रकम वारदात के बाद देने का वादा किया गया था।
रेकी के लिए खरीदी गई थी मोटरसाइकिल
सचिन ने बताया कि हत्या से पहले कई बार लखनऊ आकर संदीप सिंह की रेकी की गई। दिनेश यादव ने संदीप सिंह के घर, कार्यालय, आने-जाने के रास्ते और उनकी गाड़ियों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई थी।
रेकी और वारदात को अंजाम देने के लिए अमीनाबाद स्थित एक ऑटोमोबाइल शोरूम से सफेद रंग की अपाचे मोटरसाइकिल खरीदी गई थी। वारदात से पहले उसकी नंबर प्लेट भी हटा दी गई थी ताकि पहचान न हो सके।
वारदात वाले दिन क्या हुआ
आरोपी के मुताबिक, 27 मई को वह और संजय फिर लखनऊ पहुंचे। पहले कई दिनों तक मौका नहीं मिला, लेकिन उसी दिन संजय ने फैसला किया कि अब हत्या को अंजाम दिया जाएगा।
दोनों संदीप सिंह की कार के पीछे-पीछे चले। जैसे ही संदीप सिंह अपने कार्यालय के बाहर गाड़ी से उतरे, सचिन ने मोटरसाइकिल दुकान के पास रोकी। संजय तुरंत उतरा और बेहद करीब से संदीप सिंह के सीने और सिर पर लगातार तीन गोलियां दाग दीं। गंभीर चोट लगने से संदीप सिंह मौके पर ही गिर पड़े और दोनों आरोपी घटनास्थल से फरार हो गए।
हत्या के बाद बदलता रहा ठिकाना
घटना के बाद सचिन लगातार अंबेडकरनगर, अयोध्या, बस्ती, आजमगढ़ और मुंबई सहित कई स्थानों पर छिपता रहा। उसने पुलिस को बताया कि 27 जून को संजय के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिलने के बाद वह डर गया था और अदालत में आत्मसमर्पण करने की तैयारी कर रहा था। गिरफ्तारी वाले दिन भी वह इसी सिलसिले में वकील से मिलने आया था।
छिपाकर रखी थी हत्या में इस्तेमाल पिस्टल
पूछताछ के दौरान सचिन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल भी बरामद कर ली। आरोपी ने बताया कि वारदात के बाद पुलिस की सख्त चेकिंग से बचने के लिए संजय ने एक सुनसान स्थान पर पानी के किनारे जमीन खोदकर पिस्टल छिपा दी थी। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसे बरामद कर लिया।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपी को पीजीआई थाने में दर्ज मुकदमे में दाखिल कर दिया गया है। अब स्थानीय पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियां इस हत्याकांड से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
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