गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने एक ट्रक से 570 पेटी अवैध शराब बरामद कर तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। फरार चालक और ट्रक मालिक पर केस दर्ज।
उत्तर प्रदेश में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत 18 मार्च 2026 की रात एक ऐसा खुलासा हुआ, जिसने न केवल प्रशासन को सतर्क किया बल्कि संगठित अपराध की गहराई को भी उजागर कर दिया। गौतमबुद्ध नगर के लोहारली टोल के पास आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने एक अशोक लीलैंड ट्रक (MH 40 CT 5943) को रोका, और जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था।
पहली नजर में यह ट्रक सामान्य मालवाहक प्रतीत हो रहा था। थर्माकोल की बोरियों से लदा हुआ, मानो किसी निर्माण सामग्री को ढो रहा हो। लेकिन जब टीम ने बोरियों को हटाना शुरू किया, तो धीरे-धीरे एक साजिश की परतें खुलती चली गईं। थर्माकोल के पीछे बड़ी सावधानी से छिपाकर रखी गई थीं शराब की पेटियां—एक, दो नहीं, बल्कि कुल 570 पेटियां।
बरामद शराब में विभिन्न ब्रांड शामिल थे—रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज, स्टर्लिंग रिजर्व, मैकडॉवेल्स नंबर 1, थंडरवोल्ट बियर और किंगफिशर बियर। खास बात यह थी कि सभी बोतलों पर “फॉर सेल इन पंजाब” अंकित था, जो यह स्पष्ट करता है कि यह शराब उत्तर प्रदेश में बिक्री के लिए वैध नहीं थी।
यह मामला केवल एक ट्रक पकड़ने तक सीमित नहीं है। यह उस संगठित तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जो राज्य की सीमाओं का दुरुपयोग कर कर चोरी और अवैध व्यापार को बढ़ावा देता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब कैसे एक राज्य से दूसरे राज्य तक बिना किसी ठोस खुफिया जानकारी के पहुंच रही थी?

इस ऑपरेशन में जिला आबकारी अधिकारी गौतमबुद्ध नगर और सहायक आबकारी आयुक्त (प्रवर्तन) मेरठ के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई ने एक बड़े अवैध कारोबार को बेनकाब कर दिया। हालांकि, ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जो इस पूरे नेटवर्क की कड़ी को जोड़ने में एक अहम कड़ी साबित हो सकता था।
थाना दादरी में ट्रक मालिक और फरार चालक के खिलाफ आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। लेकिन असली चुनौती अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की है। क्या यह केवल एक isolated incident है, या फिर एक बड़े रैकेट का हिस्सा?
यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। थर्माकोल जैसी साधारण दिखने वाली चीजों के पीछे इतनी बड़ी मात्रा में शराब छिपाना दर्शाता है कि अपराधी अब अधिक चालाक और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं।
इसके साथ ही, यह समाज के लिए भी एक संदेश है। अवैध शराब न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाती है, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है। कई बार ऐसी शराब नकली या मिलावटी होती है, जिससे गंभीर हादसे हो सकते हैं।
आबकारी विभाग की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह लड़ाई अभी लंबी है। जरूरत है लगातार निगरानी, बेहतर खुफिया तंत्र और सख्त कानून प्रवर्तन की, ताकि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
रात के अंधेरे में छिपा यह खेल भले ही उजागर हो गया हो, लेकिन इसके पीछे की कहानी अभी अधूरी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस धागे को पकड़कर कितनी दूर तक पहुंचता है।
COMMENTS