यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित भारत 2047 के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प और जनकल्याणकारी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए चल रहे कार्यक्रमों की कड़ी में 18 सितंबर 2026 को 60 मीटर रोड के साथ 50 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विधायक धीरेन्द्र सिंह ने पौधरोपण किया। स्कूली छात्राओं और ग्रामीणों ने भी पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
विकास की रफ्तार के बीच हरियाली को बनाए रखने की दिशा में यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में एक विशेष पहल की गई। 18 सितंबर 2026 को यमुना प्राधिकरण की 60 मीटर सड़क के साथ बनी 50 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी, स्कूली छात्राएं और ग्रामीण भी शामिल हुए।
यह कार्यक्रम 17 सितंबर 2026 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे 12 प्रमुख कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और अनुपालन की कड़ी में आयोजित किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर सेवाकाल की जनकल्याणकारी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाना और प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना बताया गया है।
कार्यक्रम के दौरान विधायक श्री धीरेन्द्र सिंह ने पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत की। उनके साथ प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में भाग लिया।

इस अवसर पर यमुना प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश कुमार, महाप्रबंधक (परियोजना) राजेन्द्र भाटी और वरिष्ठ प्रबंधक (उद्यान) डॉ. आरती सिंह समेत प्राधिकरण के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ स्कूली छात्राओं ने भी भागीदारी की। बच्चों की मौजूदगी ने पूरे कार्यक्रम को एक अलग संदेश दिया—विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ी को भी समझाना जरूरी है।
बच्चों ने खुद लगाए पौधे, बताया पेड़ों का महत्व
वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने भी अपने हाथों से पौधे लगाए। बच्चों ने पेड़ों के महत्व के बारे में अपनी बात रखी और लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखरेख करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में केवल पौधे लगाने तक ही बात सीमित नहीं रही। बच्चों और उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया गया कि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पौधे को पेड़ बनने तक पानी, संरक्षण और नियमित निगरानी की जरूरत होती है।

स्कूली बच्चों की भागीदारी का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी रहा, ताकि हरियाली को बढ़ाने का यह प्रयास केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रहे।
ग्रीन बेल्ट में लगाई गईं देशी प्रजातियां
यमुना प्राधिकरण की 50 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट में पौधरोपण के दौरान देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई।
इस अभियान के तहत नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन और पिलखन जैसी प्रजातियों के पौधे लगाए गए। ये पेड़ भारतीय पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े माने जाते हैं और लंबे समय तक हरियाली बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रीन बेल्ट में देशी प्रजातियों का रोपण किए जाने से सड़क किनारे विकसित किए जा रहे हरित क्षेत्र को भविष्य में अधिक घना और पर्यावरण के लिहाज से उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है।
विकास के साथ हरियाली पर जोर
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच ग्रीन बेल्ट में वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में सामने आया।
60 मीटर रोड के साथ मौजूद 50 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट में पौधे लगाए जाने से सड़क के आसपास हरित क्षेत्र को मजबूत करने की कोशिश की गई है। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, स्कूली छात्राओं और ग्रामीणों ने पौधों की देखरेख तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।

यह वृक्षारोपण कार्यक्रम 17 सितंबर 2026 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे 12 प्रमुख कार्यक्रमों के क्रियान्वयन एवं अनुपालन का हिस्सा है।
दिए गए विवरण के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के निरंतर सेवाकाल की जनकल्याणकारी उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने और नागरिकों को विकसित भारत 2047 के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्रम में यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को कार्यक्रम का हिस्सा बनाते हुए वृक्षारोपण कराया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों, स्कूली छात्राओं और ग्रामीणों ने पौधों की देखरेख और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। इस दौरान लगाए गए नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन और पिलखन जैसे पौधे आने वाले वर्षों में इस ग्रीन बेल्ट की हरियाली का आधार बनेंगे।
अब इस अभियान की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लगाए गए पौधों की देखरेख कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से की जाती है, क्योंकि एक पौधा लगाना शुरुआत है, उसे सुरक्षित रखकर पेड़ बनाना ही पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक जिम्मेदारी है।
COMMENTS