आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कहा कि यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि कुत्ता कब काट ले, और सड़कों पर आवारा कुत्तों से हादसों का खतरा गंभीर है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों (Stray Dogs) से जुड़े मामले की एक बार फिर सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने बेहद अहम और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “कुत्ता कब काट ले, यह नहीं पढ़ा जा सकता कि वह किस मूड में है और किसमें नहीं।” कोर्ट ने साफ किया कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर डॉग लवर और डॉग हेटर—दोनों पक्षों की बात विस्तार से सुनेगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बेंच ने बताया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान में दो जज आवारा जानवरों के कारण सड़क हादसे का शिकार हुए, जिनमें से एक जज अब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं। कोर्ट ने कहा कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई है और यह मामला बेहद गंभीर जनसुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कुत्ते सड़कों पर नहीं, बल्कि कंपाउंड में होते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “लगता है आपकी जानकारी पुरानी है।” कोर्ट ने कहा कि सिर्फ काटने का ही नहीं, बल्कि कुत्तों का सड़कों पर पीछा करना और दौड़ना भी दुर्घटनाओं की वजह बनता है, खासकर उन सड़कों पर जहां वाहन चलते हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष सवाल उठाया कि गेटेड सोसाइटी में कुत्तों के रहने को लेकर क्या RWA को वोट के आधार पर फैसला करने का अधिकार होना चाहिए? उन्होंने कहा कि सभी जानवर प्रेमी हैं, लेकिन हम इंसान प्रेमी भी हैं, और दूसरों की सुरक्षा व सुविधा भी उतनी ही अहम है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब ने अब तक पिछले आदेशों के अनुपालन पर जवाब दाखिल नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा—“बचाव इलाज से बेहतर है, सड़कों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित और खाली रखना होगा।
COMMENTS