अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया गया है। साथ ही एफआईआर दर्ज करने, ट्रस्ट के पुनर्गठन, पांच वर्षों के चढ़ावे के ऑडिट और मंदिर प्रशासन में बड़े सुधारों की सिफारिश की गई है।
देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी 20 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट, प्रशासनिक व्यवस्था और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच में केवल नकदी गबन ही नहीं बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए कुछ आभूषणों के गायब होने की आशंका को भी रिपोर्ट का हिस्सा बनाया है। यही नहीं, रिपोर्ट में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 14 लोगों की भूमिका को जांच के दायरे में लाया गया है।
13 जून को बनी थी SIT, सात दिन में सौंपनी थी रिपोर्ट
चढ़ावा चोरी का मामला सार्वजनिक होने के बाद 13 जून को राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम ने 15 जून से जांच शुरू की और शासन के निर्देशानुसार प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी।
सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट फिलहाल गोपनीय रखी गई है, लेकिन इसमें कई ऐसी सिफारिशें शामिल हैं जो मंदिर प्रशासन की पूरी व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकती हैं।
150 लोगों से पूछताछ, कई बयान रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए
एसआईटी ने जांच के दौरान करीब 150 लोगों से पूछताछ की। इनमें ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी, कर्मचारी, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और चढ़ावे की गणना प्रक्रिया से जुड़े लोग शामिल हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई व्यक्तियों द्वारा दिए गए बयान मंदिर ट्रस्ट के उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इसी कारण जांच एजेंसी अब मामले का दायरा और बढ़ाने पर विचार कर रही है।
पूछताछ के दायरे में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव जैसे नाम भी शामिल रहे हैं।
एफआईआर और ट्रस्ट पुनर्गठन की सिफारिश
एसआईटी की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी सिफारिशें मानी जा रही हैं। जांच दल ने शासन को सुझाव दिया है कि मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर आगे की आपराधिक जांच कराई जाए।
इसके साथ ही ट्रस्ट के पुनर्गठन की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन की निगरानी के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाए।

एसआईटी का मानना है कि मंदिर जैसे बड़े संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।
पांच वर्षों के चढ़ावे का ऑडिट कराने की मांग
जांच दल ने पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और दान राशि का व्यापक ऑडिट कराने की सिफारिश भी की है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल वर्तमान प्रकरण की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि यह भी जांचना जरूरी है कि पिछले वर्षों में प्राप्त दान राशि और आभूषणों का रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से मेल खाता है या नहीं।
यदि यह सिफारिश लागू होती है तो करोड़ों रुपये के चढ़ावे का विस्तृत वित्तीय परीक्षण किया जा सकता है।
दो करोड़ रुपये की बरामदगी ने बढ़ाए सवाल
चढ़ावा चोरी मामले में अब तक पांच आरोपितों—लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू—की निशानदेही पर लगभग दो करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मंदिर के दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। इतना ही नहीं, कुछ सेवादारों को कथित गबन की जानकारी पहले से होने की बात भी जांच में सामने आई है।
इन तथ्यों ने सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी प्रणाली दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सीसीटीवी निगरानी और ऑडिट व्यवस्था में सुधार के सुझाव
एसआईटी ने रिपोर्ट में कई प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश भी की है। इनमें प्रमुख रूप से—
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चढ़ावे की राशि का नियमित और साप्ताहिक ऑडिट
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प्रतिदिन प्राप्त दान की अनिवार्य डिजिटल एंट्री
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सीसीटीवी डेटा स्टोरेज अवधि 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करना
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मंदिर कर्मचारियों की आवाजाही पर सख्त निगरानी
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बिना तलाशी प्रवेश पर रोक
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जांच पूरी होने तक आरोपितों के अयोध्या छोड़ने पर प्रतिबंध
जांच दल का मानना है कि इन उपायों से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
अब केंद्र सरकार की ओर टिकी निगाहें
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज सकती है। इसके बाद ट्रस्ट में संभावित बदलाव, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और आगे की जांच की दिशा तय की जाएगी।
फिलहाल एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने राम मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई सवालों को जन्म दे दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब सभी की निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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