उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ओखला, नई दिल्ली स्थित नवनिर्मित “मुख्य अभियन्ता - यमुना” कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान यमुना परियोजना संगठन द्वारा पूर्ण की गई 16 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी जनता को समर्पित किया गया। बाढ़ सुरक्षा, तटबंध सुदृढ़ीकरण और नहर पुनर्स्थापना से जुड़ी परियोजनाओं ने क्षेत्रीय जल प्रबंधन को नई दिशा देने का दावा किया है।
दिल्ली के ओखला क्षेत्र में बुधवार को जल संसाधन प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे को नई मजबूती देने वाला एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने नवनिर्मित “मुख्य अभियन्ता - यमुना” कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। यह भवन केवल एक प्रशासनिक परिसर नहीं, बल्कि यमुना बेसिन से जुड़े विकास, बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण अभियानों का नया संचालन केंद्र माना जा रहा है।
इस अवसर को और भी खास बनाते हुए यमुना परियोजना संगठन द्वारा पूर्ण की गई 16 बड़ी परियोजनाओं का भी लोकार्पण और जनसमर्पण किया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत ₹8803.114 लाख थी, जबकि कार्यों को ₹6831.310 लाख की लागत में पूरा कर लिया गया। इस प्रकार विभाग ने लगभग ₹1971.804 लाख की उल्लेखनीय बचत दर्ज की है, जिसे प्रशासनिक दक्षता और बेहतर परियोजना प्रबंधन का उदाहरण माना जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं में बाढ़ सुरक्षा कार्य, तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, नहरों की पुनर्स्थापना, बैराज सुरक्षा तथा प्रशासनिक अवसंरचना विकास जैसे अहम कार्य शामिल हैं। लंबे समय से यमुना और उससे जुड़े इलाकों में मानसून के दौरान आने वाली बाढ़ और कटाव की समस्या स्थानीय आबादी के लिए चिंता का विषय रही है। ऐसे में इन परियोजनाओं को भविष्य की चुनौतियों से निपटने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अपने संबोधन में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण आने वाले समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सराहनीय उपलब्धि है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में भी जनहित से जुड़े सभी कार्य गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल नई परियोजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि पुराने जल ढांचों का पुनर्जीवन भी है। नहरों और तटबंधों की मजबूती सीधे तौर पर किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी आबादी की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इसलिए विभाग को तकनीकी गुणवत्ता के साथ-साथ दीर्घकालिक उपयोगिता पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
नवनिर्मित “मुख्य अभियन्ता - यमुना” कार्यालय भवन को आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह भवन यमुना सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी, समन्वय और संचालन को अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे परियोजनाओं की प्रगति की मॉनिटरिंग तेज होगी और आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में भी सुविधा मिलेगी।
कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

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