ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS) ने CII हेल्थकेयर समिट-2026 में अपने मेडिकल इनोवेशन मॉडल और दो हेल्थटेक स्टार्टअप्स ‘मैट्री’ और ‘बीवेल’ के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। समिट में जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक सफल इनोवेशन मॉडल के रूप में सराहा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बदलती तकनीक और नवाचार के दौर में ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS) ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई (CII) हेल्थकेयर समिट-2026 के दौरान जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) द्वारा विकसित नवाचार मॉडल और यहां इनक्यूबेट किए गए दो हेल्थटेक स्टार्टअप्स ने विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर हेल्थकेयर स्टार्टअप्स और मेडिकल इनोवेशन की चर्चा निजी संस्थानों तक सीमित रहती है। ऐसे समय में एक सरकारी मेडिकल संस्थान का राष्ट्रीय मंच पर नवाचार और उद्यमिता का सफल मॉडल प्रस्तुत करना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है।

समिट के दौरान जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) में इनक्यूबेट किए गए दो हेल्थकेयर स्टार्टअप्स मैट्री (Matri) और बीवेल (BeWell) ने "डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़" सत्र में अपने अभिनव स्वास्थ्य समाधान प्रस्तुत किए।
इन स्टार्टअप्स ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और मरीज-केंद्रित बनाने से जुड़े अपने मॉडल साझा किए। प्रस्तुति के दौरान देशभर से आए निवेशकों, वरिष्ठ चिकित्सकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने इन नवाचारों में विशेष रुचि दिखाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ, स्मार्ट मॉनिटरिंग और मरीज-केंद्रित तकनीकों की बढ़ती भूमिका के बीच ऐसे स्टार्टअप्स भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।
डॉ. राहुल सिंह ने संभाली राष्ट्रीय सत्र की अध्यक्षता
जीआईएमएस के लिए यह सम्मान का विषय रहा कि सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल सिंह को समिट के "डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज़" सत्र की अध्यक्षता (Session Chair) के लिए आमंत्रित किया गया।
उन्होंने इस सत्र का संचालन करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती नई तकनीकों, मेडिकल रिसर्च, डिजिटल हेल्थ और नवाचार आधारित उपचार प्रणालियों पर विशेषज्ञों के बीच विस्तृत चर्चा कराई। उनके नेतृत्व में विभिन्न संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सरकारी मेडिकल संस्थान का मॉडल बना चर्चा का विषय
समिट में सबसे अधिक चर्चा जीआईएमएस के उस इनोवेशन मॉडल की रही, जिसके तहत एक सरकारी मेडिकल संस्थान ने स्टार्टअप इनक्यूबेशन, क्लिनिकल वैलिडेशन, उद्योग सहयोग, शोध और उद्यमिता को एक ही मंच पर जोड़ने का सफल प्रयास किया है।

दिल्ली सहित देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी और निजी अस्पतालों की मौजूदगी के बीच जीआईएमएस को एक ऐसे संस्थान के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसने मेडिकल शिक्षा और उपचार के साथ-साथ हेल्थकेयर इनोवेशन को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है।
विशेषज्ञों ने माना कि यदि इस मॉडल को अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी अपनाया जाए तो भारत में मेडटेक स्टार्टअप्स और स्वास्थ्य तकनीक के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
नवाचार से मरीजों तक पहुंचे बेहतर स्वास्थ्य समाधान
समिट के दौरान डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जीआईएमएस के नवाचार मॉडल को मिली पहचान पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां उनके नवाचार सीधे मरीजों तक उपयोगी स्वास्थ्य समाधान के रूप में पहुंच सकें।
उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल नई तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि उन तकनीकों का क्लिनिकल परीक्षण हो, उन्हें नियामकीय स्वीकृति मिले और फिर उन्हें आम लोगों तक पहुंचाया जाए। जीआईएमएस का सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन इसी दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
स्टार्टअप्स को मिल रहा है हर स्तर पर सहयोग
जीआईएमएस का सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI) स्वास्थ्य क्षेत्र के स्टार्टअप्स को केवल तकनीकी सलाह ही नहीं देता, बल्कि उन्हें क्लिनिकल मार्गदर्शन, अनुसंधान सहयोग, नियामकीय सहायता, उद्योग साझेदारी और संभावित निवेशकों से जोड़ने का भी काम करता है।

यही कारण है कि यहां विकसित हो रहे स्टार्टअप्स केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ने और स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग किए जाने की दिशा में भी मदद मिलती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के लिए बढ़ा गौरव
जीआईएमएस की यह उपलब्धि केवल संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिस तरह प्रदेश के सरकारी मेडिकल संस्थान अब केवल इलाज और मेडिकल शिक्षा तक सीमित न रहकर रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं, उससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार के नए अवसर दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी संस्थानों में इसी तरह नवाचार को प्रोत्साहन मिलता रहा तो भारत वैश्विक हेल्थटेक और मेडटेक क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
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