डिजिटल इंडिया के दौर में बढ़ती ऑनलाइन ठगी से निपटने के लिए नोएडा की कंपनी ने ‘मेड इन इंडिया’ एआई साइबर सुरक्षा ऐप ‘अरिस्टा साइबर कॉप’ लॉन्च किया है, जो स्कैम को होने से पहले ही भांप लेता है।
डिजिटल इंडिया के इस तेज़ी से बदलते दौर में साइबर ठगी आम लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, नकली नोटिस और झूठी वेबसाइट्स के ज़रिए ठग हर दिन नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसी खतरे से निपटने के लिए नोएडा की एक कंपनी ने एआई पावर्ड साइबर सुरक्षा तंत्र ‘अरिस्टा साइबर कॉप’ तैयार किया है, जो संभावित स्कैम को होने से पहले ही पहचान कर रोकने में सक्षम बताया जा रहा है।
कंपनी के सीईओ डॉ. कुणाल सिंह बेरवाल ने इस एआई आधारित ऐप और कंप्यूटर सिस्टम को लॉन्च करते हुए बताया कि अरिस्टा साइबर कॉप को एक ‘प्रिवेंटिव और प्रेडिक्टिव’ एआई मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। उनका कहना है कि यह सिस्टम केवल स्कैम के बाद चेतावनी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि खतरे को पहले ही भांपकर यूजर को सतर्क कर देता है।
डॉ. बेरवाल के अनुसार, “जहां आमतौर पर दूसरे ऐप्स सिर्फ मार्केटिंग कॉल की पहचान करते हैं, वहीं अरिस्टा यह बताने में सक्षम है कि सामने से आ रही कॉल स्कैम है या डिजिटल अरेस्ट की साजिश।

इसके अलावा यूजर किसी भी संदिग्ध डॉक्यूमेंट को स्कैन कर उसकी असलियत भी जांच सकता है।”
यह ऐप ब्राउजिंग के दौरान भी एक्टिव रहता है और फर्जी वेबसाइट या नकली नोटिस मिलने पर तुरंत चेतावनी देता है। कंपनी का दावा है कि यह पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ है और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप तैयार किया गया है।
प्राइवेसी को लेकर कंपनी का कहना है कि वह यूजर का कोई भी निजी डेटा जैसे कॉन्टैक्ट या मैसेज स्टोर नहीं करती। केवल नाम और ईमेल लिया जाता है ताकि यूजर की प्रामाणिकता बनी रहे। सरकार की ‘साइबर दोस्त’ जैसी योजनाओं के साथ मिलकर ऐसे एआई टूल्स आने वाले समय में साइबर अपराध के खिलाफ मजबूत हथियार साबित हो सकते हैं।
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