नोएडा सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर SIT की रिपोर्ट आज शासन को सौंपी जाएगी। जांच में यह साफ हो गया है कि यह एक सामान्य हादसा नहीं, बल्कि कई विभागों की गंभीर लापरवाही का नतीजा है।
नोएडा के सेक्टर-150 के पास 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी में डूबने से हुई मौत अब एक बड़े सिस्टमेटिक फेल्योर की मिसाल बनती जा रही है। शासन के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) आज अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक, तकनीकी और पुलिस स्तर की गंभीर चूक सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, SIT की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि युवराज की मौत किसी एक गलती का नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और आपदा प्रबंधन तंत्र की सामूहिक विफलता का परिणाम है। रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब दो घंटे की देरी को लेकर है। जांच में पाया गया कि पुलिस के बाद अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कर्मचारियों ने तैराकी न आने और उपकरणों की कमी का हवाला देकर असहायता जताई।

जांच में जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिले की डिजास्टर मैनेजमेंट हेड होने के बावजूद उन्होंने घटना के बाद कोई तत्काल विभागीय कार्रवाई नहीं की। हैरानी की बात यह रही कि घटना से एक दिन पहले आपदा प्रबंधन को लेकर बैठक हुई थी, फिर भी जमीनी तैयारियां नदारद थीं।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ की जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में सड़क कट और सुरक्षा उपायों की फाइल अप्रूवल के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ा। वहीं, नोएडा ट्रैफिक सेल ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने में विफल रहा और जल-सीवर विभाग ने 12 सोसाइटियों के सीवर पानी के जमाव की अनदेखी की।
पुलिस रिस्पांस टाइम भले ही रिकॉर्ड में सही रहा हो, लेकिन स्थानीय थाना प्रभारी की गैर-मौजूदगी और कमजोर मॉनिटरिंग भी रिपोर्ट में दर्ज है। अब SIT रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई और एफआईआर की तैयारी है।
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