उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बागपत पहुंचकर त्रिपुरा के दिवंगत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग के अंतिम संस्कार में भाग लिया। दोनों 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे और प्रशिक्षण से लेकर संयुक्त राष्ट्र मिशन कोसोवो तक साथ कार्य कर चुके थे। मंत्री ने परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण बुधवार को बागपत पहुंचे, जहां उन्होंने त्रिपुरा के दिवंगत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग के अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर केवल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को अंतिम विदाई देने का नहीं था, बल्कि तीन दशक से अधिक पुरानी मित्रता, साथ बिताए पेशेवर जीवन और साझा स्मृतियों को याद करने का भी भावुक क्षण बन गया।
दिवंगत अनुराग मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत के निवासी थे। वे भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे और अपने लंबे प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा जीवन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद तक पहुंचे। उनके निधन की खबर से पुलिस सेवा से जुड़े अधिकारियों, प्रशासनिक जगत और उनके परिचितों में शोक की लहर है।
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे दोनों साथी
मंत्री असीम अरुण और अनुराग का संबंध केवल पेशेवर नहीं था, बल्कि यह वर्षों पुरानी मित्रता और साझा संघर्षों से जुड़ा था। दोनों 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी रहे और उन्होंने एक ही समय पर अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत की थी।
दोनों अधिकारियों ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में पुलिस सेवा का विशेष प्रशिक्षण भी साथ-साथ पूरा किया।
प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुई यह मित्रता सेवा जीवन के विभिन्न पड़ावों तक कायम रही।
संयुक्त राष्ट्र मिशन कोसोवो में भी निभाई साथ जिम्मेदारी
असीम अरुण और अनुराग का साथ केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। दोनों अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र मिशन (United Nations Mission) कोसोवो में भी साथ कार्य किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और शांति स्थापना से जुड़े इस मिशन में दोनों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
साझा प्रशिक्षण, प्रशासनिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मिशन में साथ काम करने के कारण दोनों के बीच गहरा आत्मीय संबंध विकसित हुआ, जिसकी झलक अंतिम संस्कार के दौरान भी स्पष्ट दिखाई दी।
अंतिम विदाई के समय भावुक हुए असीम अरुण
बागपत में आयोजित अंतिम संस्कार के दौरान मंत्री असीम अरुण अपने बैचमेट और घनिष्ठ मित्र को अंतिम विदाई देते समय भावुक नजर आए। उन्होंने दिवंगत अनुराग को श्रद्धासुमन अर्पित किए और मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान उन्होंने पुराने दिनों की अनेक स्मृतियों को भी याद किया। साथ बिताए प्रशिक्षण काल, सेवा जीवन और संयुक्त राष्ट्र मिशन के अनुभवों को याद करते हुए वे भावुक हो उठे।
परिजनों को बंधाया ढांढस
अंतिम संस्कार के उपरांत मंत्री असीम अरुण ने दिवंगत अधिकारी के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का संबल दिया।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
एक समर्पित पुलिस अधिकारी की याद
अनुराग ने अपने सेवा काल में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पुलिस पदों पर कार्य किया। उनकी पहचान एक अनुशासित, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में रही। पुलिस सेवा में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
उनके निधन से न केवल पुलिस विभाग ने एक अनुभवी अधिकारी खोया है, बल्कि उनके साथ कार्य करने वाले अनेक अधिकारियों और सहयोगियों ने अपना एक भरोसेमंद साथी भी खो दिया।
पुरानी यादों ने किया भावुक
अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित अधिकारियों और परिचितों के बीच वर्षों पुरानी यादें भी साझा की गईं। प्रशिक्षण के दिनों से लेकर सेवा जीवन तक के अनेक प्रसंगों को याद करते हुए सभी ने अनुराग के सरल स्वभाव, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का उल्लेख किया।
असीम अरुण के लिए यह क्षण विशेष रूप से भावनात्मक था, क्योंकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से लेकर कई महत्वपूर्ण पड़ाव अनुराग के साथ साझा किए थे।
श्रद्धांजलि के साथ दी अंतिम विदाई
बागपत में पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ अनुराग को अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, स्थानीय नागरिक, परिजन और शुभचिंतक उपस्थित रहे।
सभी ने दिवंगत अधिकारी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन और सेवाओं को याद किया तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
अनुराग का जीवन समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना का उदाहरण माना जाता है। वहीं, असीम अरुण की उपस्थिति ने यह भी दिखाया कि प्रशासनिक सेवा में वर्षों पहले बने रिश्ते समय के साथ और अधिक मजबूत हो जाते हैं तथा कठिन समय में मित्रता की वास्तविक भावना सामने आती है।
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