उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि योजनाओं में किसी भी तरह की लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने हर सप्ताह मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता को दो-दो जलार्पण कराने, जरूरत के मुताबिक मैनपावर बढ़ाने और योजनाओं की जमीनी निगरानी के निर्देश दिए हैं।
उत्तर प्रदेश के गांवों में घर-घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजनाओं को लेकर सरकार अब किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। सोमवार को राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने अधिकारियों के सामने परियोजनाओं की रफ्तार को लेकर अपनी प्राथमिकता साफ कर दी। संदेश सीधा था—काम समय पर पूरा होना चाहिए और ग्रामीणों को योजना का लाभ जल्द से जल्द मिलना चाहिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंडलवार पेयजल योजनाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों से पिछले एक महीने की परियोजनावार प्रगति का ब्यौरा लिया। उन्होंने जहां काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए, वहीं लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर भी जोर दिया।
हर सप्ताह दो-दो ‘जलार्पण’ का लक्ष्य
समीक्षा बैठक का सबसे अहम निर्देश मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारियों को दिया गया। मंत्री ने कहा कि हर सप्ताह दो-दो जलार्पण कराए जाएं, ताकि तैयार हो चुकी पेयजल योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण परिवारों तक वास्तव में पहुंच सके।
सरकार का जोर इस बात पर है कि जिन परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है, उन्हें जल्द से जल्द उपयोग में लाया जाए। इसके लिए अधिकारियों को लगातार निगरानी करने और योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
मैनपावर बढ़ाएं, लेकिन काम की रफ्तार न रुके
स्वतंत्रदेव सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन की जरूरत है तो मैनपावर बढ़ाई जाए। उनका स्पष्ट कहना था कि संसाधनों की कमी या किसी अन्य कारण से परियोजनाओं में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों की प्रगति केवल रिपोर्ट और फाइलों के आधार पर न आंकी जाए, बल्कि जमीन पर जाकर यह देखा जाए कि वास्तव में काम किस स्थिति में है और ग्रामीणों को कब तक इसका लाभ मिलने वाला है।

बैठक में मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पेयजल योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी परियोजना में अनावश्यक देरी, काम में ढिलाई या निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य न होने की स्थिति सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के साथ-साथ निर्माण एजेंसी या फर्म के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
यानी अब जिम्मेदारी केवल सरकारी अमले की नहीं होगी, बल्कि परियोजना से जुड़ी निर्माण एजेंसियों को भी समयसीमा और गुणवत्ता के प्रति जवाबदेह रहना होगा।
गांवों में रात्रिप्रवास कर अधिकारी देखें जमीनी हकीकत
जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को केवल कार्यालयों से निगरानी करने के बजाय क्षेत्र में जाकर स्थिति देखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्रों में रात्रिप्रवास और भ्रमण करें तथा ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल से जुड़ी समस्याओं को समझें।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायत या समस्या सामने आती है, वहां मौके पर पहुंचकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। इससे न केवल योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, बल्कि ग्रामीणों को भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
हर घर तक शुद्ध पानी सरकार की प्राथमिकता
समीक्षा बैठक में स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए योजनाओं की नियमित समीक्षा के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रगति का सत्यापन भी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाएगी। खासतौर पर निर्माण एजेंसियों को लेकर मंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि लापरवाही मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंत्री ने विभिन्न मंडलों और जिलों के अधिकारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने परियोजनावार स्थिति जानी और जहां काम धीमा पाया गया, वहां उसे गति देने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह, स्टेट कोऑर्डिनेटर डीके सिंह, मुख्य अभियंता ग्रामीण उत्तर प्रदेश जल निगम एके सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब देखना यह होगा कि समीक्षा बैठक में दिए गए इन सख्त निर्देशों का असर जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देता है। खासकर हर सप्ताह दो-दो जलार्पण का लक्ष्य अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट समयबद्ध जिम्मेदारी बन गया है। आने वाले दिनों में इन परियोजनाओं की रफ्तार और ग्रामीण इलाकों में वास्तविक जलापूर्ति ही तय करेगी कि सरकारी निर्देश कितनी प्रभावी तरीके से धरातल पर उतरते हैं।
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