उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों की शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, गतिशीलता और सरकारी योजनाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। लखनऊ में समीक्षा बैठक के दौरान राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने मुजफ्फरनगर में ₹24 करोड़ की लागत से समेकित विद्यालय के लिए पांच एकड़ सरकारी भूमि जल्द चिन्हित करने, नियमित शिविर लगाने, पेंशन वितरण में प्राथमिकता देने और विभागीय योजनाओं की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन सशक्तिकरण की योजनाओं को जमीन पर तेजी से पहुंचाने के लिए सरकार ने निगरानी और संवाद व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने मंगलवार को अपने सरकारी कार्यालय में विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पात्र दिव्यांगजनों तक समय पर पहुंचना चाहिए।
बैठक का सबसे अहम संदेश रहा—सरकार और दिव्यांगजनों के बीच संवाद की कमी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
मंत्री ने विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह को निर्देश दिया कि मंडल और जिला स्तर के अधिकारियों के साथ नियमित वर्चुअल बैठकें आयोजित की जाएं। इसके साथ ही दिव्यांगजनों की ओर से भेजे जाने वाले आवेदन और प्रपत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति ने आवेदन किया है, उसे भी यह जानकारी दी जाए कि उसके आवेदन पर क्या कार्रवाई हुई।

बैठक में मुजफ्फरनगर के दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ी घोषणा भी सामने आई।
राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर में दिव्यांगजनों के लिए समेकित विद्यालय के निर्माण हेतु ₹24 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है।
अब इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी और एसडीएम से फोन पर बातचीत कर जल्द से जल्द पांच एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित करने को कहा।
इस विद्यालय का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों और युवाओं को उनकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और सुविधाओं से जोड़ना होगा। सरकार की ओर से धनराशि स्वीकृत होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त सरकारी भूमि का शीघ्र चयन और परियोजना को आगे बढ़ाना होगी।
योजनाओं का प्रचार हो, लेकिन खर्च का हिसाब भी मिले
समीक्षा बैठक में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च को लेकर भी अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रचार-प्रसार पर जो धनराशि खर्च कर रही है, उसका फीडबैक भी प्राप्त किया जाना चाहिए।
यानी सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कितना पैसा खर्च हुआ। यह भी पता होना चाहिए कि जिस प्रचार पर पैसा खर्च किया गया, उसका वास्तविक प्रभाव क्या रहा और क्या योजनाओं की जानकारी पात्र लोगों तक पहुंची।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किस मद में कितनी धनराशि खर्च हो रही है और उससे कितना सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुआ, इसकी जानकारी विभाग के संज्ञान में रहनी चाहिए।
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए मंत्री ने सोशल मीडिया को लेकर भी नई व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विभाग के लिए सोशल मीडिया से संबंधित नियमावली तैयार की जाए।
इसके साथ ही फ्लैक्स, होर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया जैसे अलग-अलग माध्यमों पर खर्च होने वाली धनराशि के अनुपात का भी निर्धारण किया जाए।
सरकार का उद्देश्य यह है कि प्रचार के सभी माध्यमों का इस्तेमाल योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रभावी तरीके से किया जाए और खर्च की निगरानी भी बनी रहे।
तहसील और ब्लॉक तक दिखेगी सरकारी योजनाओं की तस्वीर
मंत्री ने मंडल और जिला मुख्यालयों के साथ-साथ तहसील और ब्लॉक स्तर पर भी स्थायी और अस्थायी होर्डिंग लगाने के निर्देश दिए।
इन होर्डिंग्स पर सरकार की योजनाओं से लाभान्वित लोगों की जानकारी, उपलब्धियां और सफलता की कहानियां प्रदर्शित की जाएंगी।
इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी देना और उनके सफल क्रियान्वयन की तस्वीर सार्वजनिक करना है।

दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए मंत्री ने हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर शिविर लगाने के निर्देश दिए।
ये शिविर मंडल, जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
इन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभागीय योजनाओं की जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
मंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि विभागीय अधिकारी नियमित रूप से लोगों तक पहुंचें और उनकी समस्याओं को मौके पर समझें।
दिव्यांग पेंशन के लिए ₹1,47004.69 लाख का प्रावधान
समीक्षा बैठक में दिव्यांग पेंशन योजना की प्रगति भी सामने रखी गई।
मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिव्यांग पेंशन योजना के लिए ₹1,47004.69 लाख का बजट प्रावधान किया गया है।
अब तक 10,44,022 लाभार्थियों को पेंशन भेजी जा चुकी है, जिसके लिए ₹31,210.57 लाख की धनराशि खर्च हुई है।
यह कुल बजट प्रावधान का लगभग 21.23 प्रतिशत है।
मंत्री ने खास तौर पर 80 प्रतिशत दिव्यांगता वाले 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध दिव्यांगजनों को प्राथमिकता के आधार पर समय पर पेंशन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगता और बुढ़ापे की दोहरी चुनौती झेल रहे इन लोगों के लिए पेंशन कई बार आय का एकमात्र सहारा होती है। इसलिए पेंशन वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी नहीं होनी चाहिए।

दिव्यांगजनों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए सरकार ने निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों के लिए भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
हर जिले में 15 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल देने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए कुल 1,125 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए ₹3 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
मंत्री के अनुसार, एलिम्को, कानपुर नगर द्वारा 16 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में चिन्हांकन शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।
अब अगले चरण में इन शिविरों में चिन्हित पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अब निगरानी से लेकर जमीन पर लाभ पहुंचाने की चुनौती
समीक्षा बैठक से सरकार ने यह संकेत दिया है कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण योजनाओं में अब केवल बजट और लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं होगा। योजनाओं की वास्तविक पहुंच, लाभार्थियों से संवाद और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया जाएगा।
मुजफ्फरनगर में ₹24 करोड़ के समेकित विद्यालय से लेकर 1,125 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल और 10 लाख से अधिक पेंशन लाभार्थियों तक—सरकार के सामने अब इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी है।
बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक अमित सिंह और रणजीत सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब देखना यह होगा कि अधिकारियों के स्तर पर दिए गए इन निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से दिखाई देता है और दिव्यांगजनों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ-साथ सरकार और लाभार्थियों के बीच संवाद की दूरी कितनी जल्दी खत्म होती है।
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