महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष के विरोध के खिलाफ लखनऊ में विशाल जनाक्रोश पदयात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।
राजधानी लखनऊ मंगलवार को उस वक्त एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन गई, जब महिला अधिकारों के समर्थन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद सड़कों पर उतर आए। नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष के विरोध के खिलाफ आयोजित इस ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में हजारों महिलाओं ने भाग लिया और अपनी आवाज बुलंद की।
यह पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास से शुरू होकर सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन तक पहुंची। इस दौरान सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब यह साफ संकेत दे रहा था कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल संसद तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के बीच भी गूंज रहा है। इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री के साथ पूरा मंत्रिमंडल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, दोनों उपमुख्यमंत्री और सहयोगी दलों के नेता भी शामिल रहे।
विधान भवन के सामने आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों ने इसे बाधित कर अपने महिला-विरोधी चेहरे को उजागर किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को अपनी छवि सुधारने का अवसर दिया था, लेकिन उन्होंने इस मौके का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में महिलाएं अब इस अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करा रही हैं।
तेज धूप के बावजूद लखनऊ की सड़कों पर उमड़ी महिलाओं की भीड़ इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शा रही थी। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई इस पदयात्रा में महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर और जोरदार नारों के साथ विपक्ष के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
“बहन-बेटियों का अपमान—नहीं सहेगा हिन्दुस्तान” और
“महिला अधिकारों पर वार—सपा-कांग्रेस जिम्मेदार”
जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। इनमें ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘आयुष्मान भारत योजना’ जैसी पहलें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं केवल लाभ वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का आधार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य स्तर पर भी ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’, ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ और ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ जैसी योजनाएं इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को वर्ष 2029 तक लागू करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पहले ही आश्वासन दे चुके हैं। इसके बावजूद विपक्ष का रवैया नारी गरिमा के खिलाफ है, जिसके कारण आज देशभर की महिलाएं विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।
इस पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। उनके साथ युवा, बुजुर्ग, छात्राएं और कामकाजी महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं।

रैली के दौरान पूरे मार्ग पर अनुशासन और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। जगह-जगह आम जनता ने भी तालियों और नारों के साथ इस पदयात्रा का स्वागत किया। महिलाओं ने विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनकी नीतियों को महिला-विरोधी बताते हुए खुलकर चुनौती दी।
कुल मिलाकर, यह जनाक्रोश पदयात्रा केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि महिला अधिकारों के समर्थन में एक व्यापक जनआंदोलन के रूप में सामने आई। अब देखना यह होगा कि इस आंदोलन का राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ता है और क्या महिला आरक्षण का मुद्दा जल्द ही किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंच पाता है।
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