मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने समीक्षा बैठक में विभागीय कार्यों में तेजी लाने, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सरकार अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। इसी क्रम में मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में एक अहम समीक्षा बैठक की, जिसमें विभागीय कार्यों की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान मंत्री ने सबसे पहले विभाग में रिक्त पदों को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मछुआ (चतुर्थ श्रेणी तकनीकी) पदों पर भर्ती के लिए जल्द से जल्द आवश्यक कार्यवाही पूरी की जाए। साथ ही विभाग में अन्य खाली पदों को भी नियमानुसार शीघ्र भरने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों में गति लाई जा सके।
मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शासन या निदेशालय स्तर पर किसी भी पटल पर कोई भी पत्रावली लंबित नहीं रहनी चाहिए। सभी फाइलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारित किया जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

वित्तीय वर्ष 2026-27 को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय सीमा में पूरा किया जाना चाहिए, ताकि बजट का सही उपयोग हो सके और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे।
मत्स्य पालकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए डॉ. निषाद ने विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक योजनाओं की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्य दक्षता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वन ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को हासिल करने में मत्स्य विकास विभाग की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़कर आधुनिक बनाया जाए, जिससे मछुआ समुदाय की आय में वृद्धि हो और प्रदेश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

मत्स्य दुर्घटना बीमा योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को इस योजना के दायरे में लाया जाए। इसके अलावा, समितियों के गठन से जुड़े लंबित प्रस्तावों को शीघ्र निस्तारित करने और विभिन्न स्तरों से प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक हर हाल में पहुंचे। इसके लिए योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जाए। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में मछुआ भर्ती, चालक भर्ती, मत्स्य विकास निधि, नदियों में रिवर रैंचिंग, ग्राम समाज के पट्टे, अमृत सरोवर, मत्स्य पालक कल्याण कोष, मत्स्य जीवी सहकारी संघ और मत्स्य विकास निगम से जुड़े जलाशयों के प्रबंधन और राजस्व की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की गहन समीक्षा की गई। साथ ही जलाशयों में बीज संचय की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
बैठक के अंत में विशेष सचिव सुनील वर्मा ने मंत्री को आश्वस्त किया कि दिए गए सभी निर्देशों का समयबद्ध तरीके से पालन किया जाएगा। इस दौरान निदेशक मत्स्य एन.एस. रहमानी, संयुक्त निदेशक अनिल कुमार, श्रीमती मोनिशा, उप निदेशक एजाज अहमद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह बैठक संकेत देती है कि सरकार मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने और इसे आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
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