ग्रेटर नोएडा स्थित जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कानूनी शिक्षा में बदलाव, AI, IPR, ADR और सामाजिक समावेशन जैसे अहम मुद्दों पर देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने विचार रखे।
जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा द्वारा “कानूनी शिक्षा में बदलाव: सर्वोत्तम प्रथाओं के माध्यम से लॉ कॉलेजों को मजबूत करना, समकालीन चुनौतियों का समाधान करना और भविष्य के अवसरों को खोलना” विषय पर एक उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी कानूनी शिक्षा और उद्योग के बीच एक सशक्त संवाद मंच के रूप में उभरी।
कार्यक्रम का नेतृत्व संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नमिता सिंह मलिक ने किया, जिनके मार्गदर्शन में यह अकादमिक विमर्श अत्यंत प्रभावशाली रहा।
मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) एस.सी. रैना (पूर्व कुलपति, एचपीएनएलयू) ने कानूनी शिक्षा में साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक कानून जैसे विशेष विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. (डॉ.) एम. अफजल वानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पेशेवर नैतिकता के संतुलित समावेशन को भविष्य की अनिवार्यता बताया।

श्री आर.बी. शर्मा (कानूनी सलाहकार, एलपीएआई) ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की नैतिक और आध्यात्मिक दीक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। वहीं श्री प्रमोद कुमार गोयल (पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश) ने छात्रों से लॉ स्कूल के समय से ही खुद को “अदालत का अधिकारी” मानकर व्यवहार करने का आह्वान किया।
सामाजिक समावेशन पर बोलते हुए प्रो. (डॉ.) नुज़हत परवीन खान ने विशेष रूप से सक्षम और ट्रांसजेंडर छात्रों को मुख्यधारा में शामिल करने पर ज़ोर दिया।
तकनीकी सत्रों में डॉ. जी.आर. राघवेंद्र ने IPR, एडवोकेट रॉडनी डी. राइडर ने AI और नवाचार, एडवोकेट जूही अरोड़ा ने मेडिएशन व ADR, जबकि श्री निशांत नंदन ने इंडस्ट्री-बेस्ट प्रैक्टिस और कॉर्पोरेट-रेडी शिक्षा पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन श्री रुद्रभिषेक चौहान ने किया।
इस अवसर पर श्री पंकज अग्रवाल, वाइस चेयरमैन, जीएल बजाज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ने कहा कि विधि शिक्षा में नैतिकता, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण को अपनाना समय की मांग है।
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