जीएल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड रिसर्च के महिला प्रकोष्ठ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “दस्तक” नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। अस्मिता थिएटर की प्रस्तुति ने लैंगिक समानता, सम्मान और सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर जागरूकता का संदेश दिया।
महिलाओं के मुद्दों पर ‘दस्तक’, समाज को सोचने पर किया मजबूर
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर GL Bajaj Institute of Management and Research के महिला प्रकोष्ठ द्वारा एक प्रेरणादायक पहल की गई। अस्मिता थिएटर के सहयोग से “दस्तक” शीर्षक से एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज में महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सशक्त ढंग से मंचित किया गया। लैंगिक समानता, महिलाओं के प्रति सम्मान, सामाजिक पूर्वाग्रहों और सशक्तिकरण जैसे विषयों को कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुति और प्रभावशाली संवादों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया।
कलाकारों की ऊर्जा, अभिव्यक्ति और मंचन शैली ने छात्रों एवं प्राध्यापकों को न केवल भावनात्मक रूप से जोड़ा, बल्कि आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित किया। नाटक का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जगाना और सकारात्मक बदलाव की सोच विकसित करना था।

संस्थान की निदेशक डॉ. सपना राकेश ने अपने संदेश में कहा कि इस तरह के सामाजिक और जागरूकता आधारित कार्यक्रम विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने महिला प्रकोष्ठ और अस्मिता थिएटर की टीम को इस सार्थक और प्रेरणादायक पहल के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम की शुरुआत महिला प्रकोष्ठ द्वारा कलाकारों के स्वागत से हुई। सम्मान स्वरूप कलाकारों को पौधा भेंट किया गया, जो विकास, आशा और सशक्तिकरण का प्रतीक माना जाता है। यह सम्मान न केवल आभार का प्रतीक था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मक बदलाव का संदेश भी दे रहा था।
कार्यक्रम के समापन पर महिला प्रकोष्ठ ने अस्मिता थिएटर की टीम, विद्यार्थियों और समस्त संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भर नहीं था, बल्कि समाज में महिलाओं के अधिकारों, समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक गंभीर और सार्थक प्रयास साबित हुआ। “दस्तक” ने यह स्पष्ट कर दिया कि बदलाव की शुरुआत जागरूकता से होती है—और जब युवा पीढ़ी आगे बढ़कर सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाती है, तो परिवर्तन निश्चित है।
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